असफलता से सीखें - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
मंगलवार, नवंबर 21, 2023
सदा पराजय आलसी, व्यसन कलह संलग्न।
मुफ़्तखोर निन्दक मनुज, दंगा हिंसा मग्न॥
अहंकार पद पा मुदित, मदमाता इन्सान।
पराजय विचलितमना, खो विवेक पथ यान॥
कठिन पराजय सहन जग, हो विचलित इन्सान।
कठिन धैर्य संयम सबल, मति विवेक सद्ज्ञान॥
प्रकृति मनुज नित विजय की, पौरुष यश सम्मान।
तनिक चूक यदि ध्येय पथ, पराजित इन्सान॥
समझो नित असफलता, दिखलाती नव राह।
दिग्दर्शक पथ सारथी, पूरी होती चाह॥
मानवता रक्षण वजह, पौरुष विजय महान।
कभी पराजय या विजय, जीवन सत्पथ मान॥
अमर ज्योति दीपक समझ, खुले सिद्धि नव सोच।
दिखे पराजय में भला, तज पौरुष संकोच॥
कमी कहीं पुरुषार्थ में, आत्मचिन्तना बोध।
असफलता नित प्रेरणा, समझो मत अवरोध॥
विजय पराजय निशि दिवस, सुख दुख सम आभास।
लिखे पराजय सत्कथा, मीत प्रीत मुखहास॥
कवि निकुंज जीवन कथा, सदा पराजय प्रीत।
आरोहित सत्पथ शिखर, गिरे संभले मीत॥
सीख मिले असफलता, नवीकरण पुरुषार्थ।
गढ़ें नवल सत्पथ सुयश, राष्ट्र धर्म परमार्थ॥
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