बुद्ध - कविता - संजय राजभर 'समित'
मंगलवार, नवंबर 21, 2023
एकाग्र चित्त होकर
जो अन्तर्मुखी है
उदार होकर
गहन सोच में
सारे मनोवृत्तियों को समेटे
आत्म अवलोकन के लिए
प्रकृति के स्वरूप में लीन है
गहन तम में
दिव्य है
प्रकाशित है
वह बुद्ध है।
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