बिमारियाँ - कविता - गणपत लाल उदय
शुक्रवार, दिसंबर 08, 2023
खान-पान में आजकल यह सन्तोष सभी रखिए,
इस काल्पनिक दुनियाँ से अब-बाहर निकलिए।
युवाओं में भी बढ़ रही है ये मोटापे से बिमारियाँ,
बाहरी खाना-खाने से अब तो परहेज़ कीजिए॥
जीभ के थोड़े टेस्ट से शरीर को ना बनाओ वेस्ट,
करो रोज़ योग व्यायाम जो सबके लिए है बेस्ट।
एक बार वजन बढ़ गया तो होता ही रहेगा टेस्ट,
घर की रोटी-सब्जी खाना है सबके लिए बेस्ट॥
बनाकर रखना है सबको चटोरेपन से सदैव दूरी,
नहीं तो फिर बनती रहेगी ढेरों तरह की बिमारी।
चाहे घर का रूखा सूखा ही हो उसको खा लेना,
पछताओगे नहीं माने तो तुम लोग उम्र ये सारी॥
कम खाकर ही स्वच्छ नीर सब दबाकर पी लेना,
बढ़ रही है कम-उम्र में बिमारियाँ सम्भल जाना।
हार्टअटैक, हार्ट फेल, किडनी ख़राब ना होने देना,
मैदा से बनी मिठाई और पीज़ा ना कोई खाना॥
केमिकल युक्त कोल्ड ड्रिंक, ड्राई फ्रूट्स से बचना,
कम्पनियों का महिनों पुराना सामान मत खाना।
है विचारणीय गंभीर विषय इसे हल्के में न लेना,
२२-२३ के युवा भी अब सम्भल कर सब रहना॥
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर