आज घर-घर दिए फिर जलाएँगे हम - गीत - सुषमा दीक्षित शुक्ला
शनिवार, जनवरी 20, 2024
खिल उठे दिल, पड़े श्रीराम के क़दम,
आज घर-घर दिए फिर जलाएँगे हम।
आपका शुभ दरस पा गए आज हम,
आज सार्थक हुआ है ये मेरा जनम।
आज घर-घर दिए फिर जलाएँगे हम॥
ये धरणि खिल उठी, ये गगन झूमता,
आपके शुभ क़दम सारा जग चूमता।
हर डगर झूमती हर नगर झूमता,
हर तरफ़ है ख़ुशी, नाचते देवता।
लोग इतरा उठे, मन चमन झूमता॥
भोले शंकर भी स्वागत में आएँ स्वयं,
आज सरयू के थिरके हैं फिर से क़दम।
आज घर-घर दिए फिर जलाएँगे हम,
खिल उठे दिल पड़े श्रीराम के क़दम।
आपका शुभ दरस पा गए आज हम॥
आप का आज आना, बड़ी बात है,
आपके शुभ चरण, एक सौग़ात है।
सँग लखन लाल हैं जानकी साथ है,
हो गया भोर है गई गयी रात है।
हर तरफ़ बस ख़ुशी की ही बारात है॥
आज हनुमत भी नाचें है होकर मगन,
मन ये ख़ुश हो गया ख़ुश हुए हर नयन।
स्वर्ग सी हो गई ये धरा एकदम,
आज घर-घर दिए फिर जलाएँगे हम।
खिल उठे दिल पड़े श्रीराम के क़दम,
आपका शुभ दरश पा गए आज हम।
आज सार्थक हुआ है ये मेरा जनम॥
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