कमल पुरोहित 'अपरिचित' - कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
राम सिया का कर अभिनन्दन - गीत - कमल पुरोहित 'अपरिचित'
सोमवार, जनवरी 15, 2024
मन में मत रख प्यारे उलझन
राम सिया का कर अभिनन्दन
कौशल्या के राज दुलारे
सौम्य मधुर लगते हैं प्यारे
दशरथ के हैं पहले नंदन
माथे पर जिनके हैं चंदन
मन में मत रख प्यारे उलझन
राम सिया का कर अभिनंदन
मर्यादित है उनका जीवन
राज पाट को छोड़ चले वन
तोड़े सब माया के बंधन
सुख त्यागा घूमे वो वन-वन
मन में मत रख प्यारे उलझन
राम सिया का कर अभिन्दन
त्याग करोगे राम मिलेंगे
प्रेम करोगे श्याम मिलेंगे
राम श्याम को पाना है तो
मोह जगत से दूर हटा मन
मन में मत रख प्यारे उलझन
राम सिया का कर अभिनंदन
प्रीत राम से गर करना है
दिल में बस उनको रखना है
उनके पदचिन्हो पर चल मन
जीवन बन जाएगा कुंदन
मन में मत रख प्यारे उलझन
राम सिया का कर अभिनन्दन
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