सुनो तनिक राधा सखी - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
गुरुवार, मई 23, 2024
सुनो तनिक राधा सखी, लाओ मधुरिम हाथ।
गाओ मुरली आज तू, मैं हूँ गैया साथ॥
लीलाधर यशुमति लला, समझ रही तुझ चाल।
मैं तेरी जीवन सखी, नहीं फँसूँगी जाल॥
नटवर लीला राधिका, समझ रही गौरांग।
पंचम स्वर गा बाँसुरी, साथ प्रिया के संग॥
मैं कान्हा की सहेली, हृदय नाद सुखधाम।
माधव मन मैं कल्पना, राधा गोरी श्याम॥
बरसाना कन्या धिया, गोकुल गोपी मीत।
राधा मोहन की कला, मुरलीधर संगीत॥
मन मुकुन्द मुकलित मृदुल, मीत मनोहर मान।
मैं माधव मन माधवी, मनमोहन मधुपान॥
मधुर मुग्ध मृदुभाषिणी, मोहन मुख मुस्कान।
मधुकर मधुशाला मधुर, माखनचोर सुगान॥
बनी संगिनी कृष्ण मन, चारु ललित अभिराम।
गिरिधर की चितचंचरी, तू राधा सखि वाम॥
राधे राधे श्याम जग, शाश्वत जीवन गान।
कृष्ण नाम राधा बिना, भक्ति असम्भव मान॥
प्रथित होऊँ राधारमण, गोपीकान्त सुनाम।
मुक्ति मार्ग मानव जगत, राधा प्रिय घनश्याम॥
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