घुमड़-घुमड़ घनघोर घटा छाए रही - मनहरण घनाक्षरी छंद - राहुल राज

घुमड़-घुमड़ घनघोर घटा छाए रही - मनहरण घनाक्षरी छंद - राहुल राज | Manharan Ghanakshari Chhand - Ghumad Ghumad Ghanghor Ghata Chhaye Rahi. सावन पर मनहरण घनाक्षरी
घुमड़-घुमड़ घनघोर घटा छाए रही,
स्वेत घन श्याम बन गगन गर्जन लगे।
लगत है बच रहे इन्द्र के नगाड़े आज,
दानव दलन देव रण में सजन लगे।
उमड़ पड़ा जैसे देवन का दंगल ये,
विजय के बाजे यह वन में बजन लगे।
मन हर्षित जब बरसत काले घन,
लगत के हीरा मोती धरन झरन लगे।

राहुल राज - गोटेगांव, नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)

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