चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव - प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)
हौसलों की उड़ान - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव
मंगलवार, जुलाई 23, 2024
दर्द की आग में तपकर बनें हैं हम,
हर मुश्किल से लड़कर बनें हैं हम।
हौसले की उड़ान है अभी बाक़ी,
मंज़िलें हासिल कर दिखाएँगे हम।
हैं ख़ारों भरी राहें, ये सच है,
मगर काँटों से भी दोस्ती कर लेंगे हम।
ज़िंदगी का हर पल जी लेंगे हम,
हर ग़म को हँसी में बदल देंगे हम।
ज़िंदगी के हर इम्तिहान से गुज़रेंगे हम,
हर मोड़ पर नई कहानी लिखेंगे हम।
हार को जीत में बदल देंगे यारों,
अपने ख़्वाबों की तस्वीर सजाएँगे हम।
हर आँसू को मुस्कान में बदल देंगे हम,
हर मुश्किल को आसान बना देंगे हम।
दिल में बसी हर ख़्वाहिश पूरी करेंगे,
अपने हौंसले से नई राहें बनाएँगे हम।
रास्ते चाहे कितने भी कठिन हों,
अपने इरादों से रोशनी फैलाएँगे हम।
हर अँधेरे को उजाले में बदल देंगे,
अपने सपनों की दुनिया बसाएँगे हम।
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