तेज नारायण राय - दुमका (झारखण्ड)
मेरी हार ही मेरी असली ताक़त है - कविता - तेज नारायण राय
सोमवार, जुलाई 22, 2024
मेरी हार जब मेरे गाल पर
तमाचा बनकर लगती है
तब बेशक तिलमिला उठता हूँ मैं लेकिन धैर्य नहीं खोता कभी
गिर जाता हूँ सोच की गहरी खाई में और गिरकर सोचता हूँ मन ही मन
अपनी कमज़ोरियों के बारे में
फिर मन ही मन
उतरता हूँ धीरे-धीरे
मन की गहराई में
और बड़े शांत भाव से टटोलता हूँ अपने अंदर की ताक़त को
सोचता हूँ जो लोग मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी समझ ताने मारते हैं
और कुछ ना कर पाने का
ग़लत अर्थ निकाल बैठे हैं
यहाँ तक कि
मेरी हार को मेरी कमज़ोरी समझ
सिक्के की तरह उछालते
लगाते हैं
भरी महफ़िल में जोरदार ठहाके
अपनी ताक़त के तराजू पर
तौलते हैं मेरा वजूद
और बताते हैं लोगों को कि
उनके सामने मेरा वजूद
तकिये में भरे रुई सा है
उन्हें घमंड है कि वह
एक फूँक मारकर उड़ा देंगे हमें
हवा में
लेकिन उन्हें कैसे बताएँ
कि मेरे समुद्र से गहरे शांत मन में
जब उठेगी एक दिन लहरें...
तो बहा ले जाएँगी
उनके बसे बसाए
घमंड के साम्राज्य को
और जिसमें डूब जाएगा
उनका अहंकार
कोई जाकर बता दे उन्हें
कि हर हार का मतलब
सिर्फ़ हार नहीं होता
और न ही हर जीत का मतलब
सिर्फ़ जीत होता है
क्योंकि मेरी हार ही
मेरी असली ताक़त है
जो एक दिन मेरी जीत में बदलेगी।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर