मुसाफ़िर - कविता - निखिल शर्मा

मुसाफ़िर - कविता - निखिल शर्मा | Hindi Prerak Kavita - Musaafir - Nikhil Sharma. Hindi Motivational Poem. प्रेरक कविता
जो टूटें अरमाँ
तो टूटने देना।
जो ख़्वाब बिखरें
तो बिखरने देना।
कुछ तो सबक़ मिलेगा
कुछ तो हौसला ज़ाहिर होगा।
दिन कट गया
रात तो होगी 
और रात दुख भरी रही 
तो क्या हुआ
सुख भरी सुबह तो होगी 
तुम तो मुसाफ़िर
सफ़र-ए-मंज़िल के।
ये ज़माना तुम्हारे हक़ में 
या ख़िलाफ़ में
तुमसे क्या
तुम्हे तो चलते रहना है।


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