श्याम नन्दन पाण्डेय - मनकापुर, गोंडा (उत्तर प्रदेश)
सुना है सपने सच होते हैं - कविता - श्याम नन्दन पाण्डेय
शुक्रवार, जुलाई 26, 2024
मन की तरंगे बढ़ने दो
मन पतंग सा उड़ने दो
पंख तेरे अब खुलने दो
भ्रम की दीवारें गिरने दो
नैनो में सपने पलने दो
सिंचित-पोषित
बीज अंकुरित होते हैं
सुना है, सपने सच होते हैं।
उम्मीद का सूरज उगने हेतु
अंधियारा मिटाने हेतु
उजियारा फैलाने हेतु
ख़ुशियों के मोती चुनने हेतु
गहराई में,
गोते लगाने पड़ते हैं
सुना है, सपने सच होते है।
बिन थके जो हम
चलते रहें,
कर्तव्य् पथ पर जो
हम डटे रहें,
उत्साह और विश्वास से
हम भरे रहें...
तब जाके हम कर्मठ बनते है
सुना है, सपने सच होते हैं।
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