अरशद रसूल - बदायूं (उत्तर प्रदेश)
कैसे आवाज़ हमारी वो दबा सकते हैं - ग़ज़ल - अरशद रसूल
शुक्रवार, अगस्त 16, 2024
अरकान : फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
तक़ती : 2122 1122 1122 22
कैसे आवाज़ हमारी वो दबा सकते हैं,
हम अगर चाहें तो कोहराम मचा सकते हैं।
माँगकर पैर वह कद अपना बढ़ा सकते हैं,
क्या कहीं ऐसे कोई दौड़ लगा सकते है?
रूह में आप उतर जाएँ बहुत मुश्किल है,
हुस्न की शान में नगमे ही सुना सकते हैं।
आब-ओ-दाने का बंदोबस्त नहीं है लेकिन,
हम परिंदों को तो पिंजरे से उड़ा सकते हैं।
हार जाते हैं बहुत शौक़ से जीती बाज़ी,
क़त्ल रिश्तो का वही लोग बचा सकते हैं।
चापलूसी का जिन्हें ख़ूब हुनर आता है,
ये क़सीदे तो वही लोग सुना सकते हैं।
जिनको फ़ुर्सत है ज़माने के ग़मों से 'अरशद',
तेरी राहों में वही फूल बिछा सकते हैं।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर