सत्यकाम - भोपाल (मध्य प्रदेश)
तुम सच में राधा जैसी हो - कविता - सत्यकाम
शुक्रवार, अगस्त 02, 2024
तुम सच में राधा जैसी हो
तुम तितली फूलों वाली हो
तुम सावन झूलों वाली हो
तुम ऊँची बनी हवेली हो
तुम सुंदर नई नवेली हो
तुम सुरा सूक्त वो प्याली हो
तुम कैसी भोली भाली हो
तुम पारिजात तुम बेला हो
तुम संध्या पूजन वेला हो
तुम मन की गति सी स्यंदन हो
तुम मलयगिरी का चंदन हो
तुम बारिश भादों वाली हो
तुम बड़े विवादों वाली हो
तुम तिरछी तेज़ कटारी हो
तुम सच में राधा जैसी प्यारी हो
तुम्हारी मुस्कान में प्रेम की बारी हो
तुम्हारी आँखों में कृष्ण का बसेरा हो
तुम्हारे साथ में प्रेम की नई बहार हो
तुम्हारी हँसी में वृंदावन की ख़ुशबू हो
तुम्हारे साथ में प्रेम का रंगीन संसार हो
तुम सच में राधा जैसी प्यारी हो
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