विनय विश्वा - कैमूर, भभुआ (बिहार)
कवि होना - कविता - विनय विश्वा
गुरुवार, सितंबर 12, 2024
दुनिया का सबसे बड़ा दुःख कवि होना है
वह सबका दुःख ओढ़ लेता है
सबके सुख की कामना करता है
रचना में एक कुशल कारीगर
संसार को शब्दों के रंग रोगन से ख़ूबसूरत बना देता है
जहाँ दूसरों के लिए सुख की सारी सामग्री होती है
वह संसार का सौंदर्य गढ़ता है
एक मज़दूर की तरह।
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