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शौचालय - अवधी गीत - संजय राजभर 'समित'
नाही शौचालय त् नाही गवनवा, मोरे सजनवा हे! मोरे सजनवा बनवा दीं बेचके गहनवा। नारी के सिंगार हऊवे, नारी के हया। ऐकरा बचा लीं राजा, ब…
ले चल रे! कहरवा पिया के नगरी - अवधी गीत - संजय राजभर 'समित'
कइसे चली डगरिया भर के गगरी। ले चल रे! कहरवा पिया के नगरी।। ओकरा से मोर शरधा बा लागल। दुनिया में लहँगा कई बार फाटल।। अबकी बार फटी त पिय…
नशा नाश क मूल बा - अवधी गीत - संजय राजभर "समित"
देई डुबाय नइया, इ भाँग दारू गँजवा। सुना हो सईयाँ जी, जर जाई करेजवा।। थू-थू करत बा आज, गँऊवा के लोगवा। सब कुछ बिकाय जाई, छुटी ना ई रो…
मिलन क जज़्बात - अवधी गीत - संजय राजभर "समित"
आज आवत बाड़य राजा हमरे-2 बार चँहकत होईंय। छतवा पे चढि-चढि ताकत होईंय। मुंडेर पे कागा आज बड़ा नीक लागत होई। समयिया रूकल बा जइसे उनके …
निर्गुण - अवधी गीत - संजय राजभर "समित"
समयिया के रथवा पे, उमरिया सवार बा। बालू नियर मुट्ठी में, जिनगिया हमार बा।। हे! कवन सुख पइबय तू, माया के बटोरी। केतनो सहेज लेबय, होइ …
रात दिवस नित रटत हूँ - कविता - सुषमा दिक्षित शुक्ला
सुनु आया मधुमास सखि, लगा हृदय बिच बाण । देहीं तो सखि है यहाँ , प्रियतम ढिंग है प्राण । किहिके हित संवरूं सखी, केहि हित …
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