संदेश
जंगल का दृश्य - कविता - आशीष सिंह
ये लहरें नदी की, पावस की फुहार, ये है कानन का तरुवर, यहाँ शीतल बयार। यहाँ तितलियों का डेरा, फूल खिलते हज़ार, यहाँ चिड़ियों की चह-चह, यह…
वृक्ष महिमा - दोहा छंद - हनुमान प्रसाद वैष्णव 'अनाड़ी'
धरती को दुख दे रहे, धूल,धुआ अरु शोर। इनसे लड़ना हो सुलभ, वृक्ष लगे चहु ओर॥ विटप औषधी दे रहे, रोके रेगिस्तान। तरुवर मीत वसुन्धरा, कलियुग…
अरण्य चालीसा - चौपाई छंद - हनुमान प्रसाद वैष्णव 'अनाड़ी'
दोहाः गुरुपद कमल नमन करूँ, वन्दउ प्रथम गणेश। वरद हस्त मस्तक धरो, करिए कृपा विशेष॥ जय वन देवी, जय वन देवा। देत सकल जग मंगल मेवा॥ जय जय …
धरती का भूषण हैं पौधे - गीत - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
धरती का भूषण हैं पौधे गिरे धरा जीवन बुझते। उड़े पखेरू छोंड़ घोंसला चींचीं चूजे रोते रहते खा गईं चीलें कौवे नोंचें हँसे बहेलिया आग जलाए…
जंगल युग की ज़रूरत - लेख - देवेन्द्र नारायण तिवारी "देवन"
सभी जीवों में अपना भोजन स्वयं बनाने की क्षमता नहीं होती। अपने भोजन की पूर्ति के लिए जीव उत्पादकों पर निर्भर होते हैं। और उत्पादक हरे प…
चिड़िया की वेदना - गीत - भगवत पटेल
मेरी इक छत की मुँडेर से, बोले एक चिरैय्या, सुन भैय्या! सुन भैय्या! सुन भैय्या!! पानी नही बरसाता बादल, मैं प्यासी की प्यासी, भूखे प्यास…
काटते जंगल - कविता - डॉ. सरला सिंह "स्निग्धा"
काटते जंगल वे बनाते हैं कंकरीटों के फिर महल। उसी में रमते हैं खुशी से जाता मन उसी में बहल। दिलो दिमाग़ पर हावी है धन दौलत की बस चाह। द…
जंगल - कविता - अवनीत कौर "दीपाली सोढ़ी"
मन गहरा, घना जंगल समान, गुमशुदा है, इस जंगल में बहुत अरमान। मीलो के हैं फ़ासले, मेरे और इसके दरमियान। बहुत सी उमीदों के मीनार, किया मन …
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