संदेश
दीपोत्सव - कविता - डॉ॰ रेखा मंडलोई 'गंगा'
अमावस की काली रात में सबने दीपमालाएँ सजाई, आई दीपावली आई। राजा-राम के स्वागत की घड़ी आई, माता-लक्ष्मी सुख-समृद्धि भर लाई। धारण कर नए-नए…
दीपोत्सव - कविता - महेन्द्र सिंह कटारिया
ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पदा, संग में मान प्रतिष्ठा प्यार। लेकर आया जन-जन में, दीपोत्सव का यह त्यौहार। आम्र पल्लव गेंदा पुष्पों की, द्वार च…
शुभ दिवस दिवाली - कविता - कर्मवीर 'बुडाना'
दीप जल उठे हैं इतने, कि यक़ीं हैं तम हटेगा अमावस का, तू चेहरे पर ख़ुशियाँ रख, चाँद भी आएगा शुभ दिवस का। आज वसुंधरा ने पहनी हैं सुंदर तार…
आज दीवाली है आँगन दीप से भर दो - गीत - श्याम सुन्दर अग्रवाल
आज साथी शुभ लगन है, और यह मन भी मगन है, बह रहा शीतल पवन है, कह रहा श्यामल गगन है– रात की काली चुनरिया झिलमिली कर दो, आज दीवाली है आँगन…
जगमगाते दीप - कविता - रूशदा नाज़
थके हुए मन से क्यूँ जीते है? उदास चेहरे पर मुस्कान लाते है आइए उमंगो में जीते है जगमगाते जग में स्नेह का दीपक जलाते है आइए मिलकर दिवाल…
दीप जले सद्भावना - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज' | दिवाली पर दोहे
दीप जले परहित मदद, बचपन ज्ञानालोक। मिटे अंधेरा दीनता, भूख प्यास तम शोक॥ सागर मंथन से प्रकट, धन्वन्तरि भगवान। दीप जले जय सुख विभव, ख़ुशि…
ज्योति पर्व - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' | दीवाली पर मुक्तक
निर्धन की झोपड़ियों में जा दीपक एक जला आना, लाई गट्टा खील खिलौने जाकर उन्हें खिला आना। जहाँ शहीदों की समाधि हो शीश झुकाकर दीप जलाना– फ…
पर्व पर आनंद मनाऊँ कैसे? - कविता - अंकुर सिंह
देखा था रोशनी जिन अपनों संग, बिछुड़ उनसे दीप जलाऊँ कैसे? रूठे बैठे है जो अपने सगे संबंधी, बिन उनके मैं तिमिर हटाऊँ कैसे? रिश्तों में उप…
दीपावली की महिमा - कविता - शरद कुमार शिववेदी
दीपावली आई ख़ुशियाँ झोली भरकर लाई, पन्द्रह दिन पहले से तैयारी हो रही भाई। मकान व दुकान की साफ़-सफ़ाई, रंगाई-पुताई करो मेरे भाई॥ सामान की …
दीप - कविता - इन्द्र प्रसाद
दीप से दीप तुम भी जलाते रहो, दीप से दीप हम भी जलाते रहें। मन में अँधेरे जो ढेर सारा भरा, तुम भगाते रहो हम भगाते रहें॥ है तमस का असर, छ…
दीप जलें - गीत - सुशील शर्मा
दीप जलें उनके मन में, जो व्यथित व्यतीत बेचारे हैं। दीप जलें उनके मन में, जहाँ लाचारी में जीते हैं। दीप जलें उनके मन में, जहाँ होंठों क…
हे तिथि अमावस दीपरात्रि! - कविता - राघवेंद्र सिंह | दीपावली पर कविता
हे तिथि अमावस दीपरात्रि! हे माह कार्तिक कृष्ण रात्रि! हो रहा आगमन दिव्य रूप, हो रहा कान्तिमय नव स्वरूप। कट रही दिशाओं की बाधा, दीपों न…
दीवाली की जगमग रात - कविता - रमाकांत सोनी 'सुदर्शन'
दीयों की रोशनी में जगमगा रही, दिवाली की जगमग रात। जहाँ-जहाँ राम ने चरण रखे, हो रही ख़ुशियों की बरसात। अमावस की काली रात भी, रोशनी से रो…
ख़ुशियों के दीपक जले - दोहा - डॉ. राम कुमार झा 'निकुंज' | दीवाली पर दोहे
ख़ुशियों के दीपक जले, जग मग जगमग लोक। मिटे तिमिर अज्ञान का, रोग मोह मद शोक॥ ख़ुशियों के दीपक जले, बाल अधर मुस्कान। घर आँगन सब स्वच्छ …
मिट्टी के दीप जलाना - गीत - अंशू छौंकर 'अवनि'
क़सम तुम्हे इस मिट्टी की, मिट्टी के दीप जलाना। तिमिर मिटेगा जब दीवाली, में मिट्टी के दीप जलेंगे। और तभी चहुँओर चमन में, मुस्कुराहट के …
अच्छा हो एक दीप जलाओ - कविता - डॉ॰ आर॰ सी॰ यादव
अच्छा हो एक दीप जलाओ। सोए मन दर्पण के भीतर, नन्हा सा एक दीप जलाओ। अलसाई नींदों से जागो, ख़ुशियों का संगीत बजाओ। अच्छा हो एक दीप जलाओ॥ ट…
आया दीपों का त्यौहार - बाल गीत - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
झट पट दिए निकालो बच्चों, आया दीपों का त्यौहार। चिड़ियाँ चहक रहीं उपवन में, घर-घर में रौनक़ आई। मौसम अब हुआ सुहावना, चहुँदिश हरियाली छाई।…
मिट्टी के दीए - कविता - अनूप अंबर
मिट्टी के दीए जलाना तुम, ख़ुशियों का संसार सजाना तुम। पर इतना तुमको सदा याद रहे, किसी के आँसू मत बन जाना तुम। उम्मीद सजा कर अपने मन में…
प्रज्वलित कर लो दीप सत्य का - कविता - गोकुल कोठारी
कितना घना हो चाहे अँधेरा, एक दीप से डरता रहा है, हारा नहीं जो अब तक तमस से, हर जलजले में जलता रहा है। कहता है सूरज से आँखें मिलाकर, अग…
आई दीवाली - कविता - हिमांशु चतुर्वेदी 'मृदुल'
माना रात है अँधेरी काली, फिर भी हुआ रौशन जग सारा। दुल्हन बनी है ये धरती न्यारी, चमक रहा हर घर, गली, चौबारा। दीपों की जगमग-जगमग है, बाज़…
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