संदेश
नदी की धारा - कविता - राजेश राजभर
जल ही जल निर्मल पावन अखण्ड अलौकिक मन भावन हे सरिता, तटिनी, तरंगिणी, जीवनदायिनी निर्झरिणी। उदगम अनन्त अद्भुत संकरी बिखरी धाराएँ, सम्मिल…
शांत नदी - कविता - निवेदिता
एक अध्याय का प्रारम्भ, और धारा फूट जाती है, कई ढलानों को पार कर, टकराती-चोट खाती, लड़खड़ाती संभलती टूटती बिखरती, फिर एक होती जाती है। …
यमुना - आलेख - बिंदेश कुमार झा
सदियों से यमुना और कारखानों के बीच के संबंध बिगड़ते जा रहे हैं। शायद वैश्वीकरण ने यमुना के उपकारों को भुला दिया है। यमुना को इस बात से…
नदी और बाढ़ - कविता - डॉ॰ प्रियंका सोनकर
नदी में बाढ़ का आना उसकी आँखों में चमक आना था इस बार बूढी दादी को छोटी-छोटी मछलियाँ याद आई साथ याद आया उसे अपना बचपन गवना से पहले जब…
नदी की व्यथा - कविता - हनुमान प्रसाद वैष्णव 'अनाड़ी'
शैलसुता में सरिता सुन्दर नागिन सी लहराती हूँ। दरिया खेत गॉंव वन सबको मैं जल पान कराती हूँ॥ मेरा जन्म पहाड़ों से, मैं मैदानों में आती …
नदी व घाट - कविता - सुनीता भट्ट पैन्यूली
जीवन नदी है और गुरू घाट या पड़ाव, जो प्रतिबद्ध हैं सदियों से बिगड़ैल नदियों का रूख मोड़ने में... गुरु नदी में बहती अनचाही खरपतवार या …
नदी की कहानी - नवगीत - अविनाश ब्यौहार
कौतुकी हुई है नदी की कहानी। उद्गम से शुरू फिर चौड़ा है पाट। मिलते हैं रस्ते में नदिया औ घाट।। चूमें है चश्म मौजों की रवानी। काटा है रास…
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