संदेश
पापा का जाना - कविता - तुलसी सोनी
आँखों के सामने छा गया अचानक अंधकार। मैं ज्वालामुखी में जल रहा था, अतिवृष्टि से मेरा हृदय दहल रहा था, भूकंप के झटकों से मैं डोल रहा था,…
कहाँ मिलेगी अब वह छाँव? - कविता - कुमुद शर्मा 'काशवी'
रहा कहाँ अब वो परिवार का मुखिया, वटवृक्ष सम जो कभी सीना तान खड़ा था, उदित हुए थे जिसकी छत्रछाया में नव पल्लव खिले थे पुष्प सुनहरे आँग…
पिता आप भगवान - कविता - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
आनंदित कुल पूत पिता पा, किया समर्पित जान सदा है। पिता त्याग सुख शान्ति ज़िंदगी, पूरण सुत अरमान लगा है। लौकिक झंझावात सहनकर, पिता सदा चु…
पुरुष - कविता - वंदना गरूड़
पुरुष आधार है, पुरुष संबल हैं स्त्री का, पुरुष भविष्य है आने वाले कल का, बचपन से होती है, पुरुष से कई उम्मीदें, बुढ़ापे तक दे जाता है …
मेरे पिता - कविता - सुरेन्द्र प्रजापति
अपने पिता के बीते जीवन को जितना जानने की कोशिश करता हूँ अक्सर हारा हुआ, और हटाश महसूस करता हूँ जबकि दुःख से मुठभेड़ करते कभी उदास नहीं …
अंतिम संस्कार का विज्ञापन - कहानी - मानव सिंह राणा 'सुओम'
विज्ञानपन देखा तो हिल गए राजमणी त्रिपाठी। “कैसा कलियुग आ गया है? अब माँ बाप के लिए बच्चों पर इतना समय नहीं कि वह उनको अपना समय दे सके …
देर कर दी आते-आते - गीत - रमाकांत सोनी 'सुदर्शन'
ख़ूब कमाया धन दौलत, थक गए तुम्हें बुलाते, प्राण पखेरू उड़ गए उनके, जन्मदाता कहलाते। उठ गया साया सर से तेरा, कभी पुत्र धर्म निभाते, बुढ़…
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