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अब फिर घिर आए बादल भी - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
अब फिर घिर आए बादल भी, उन यादों की बून्द लिए। बहते हैं सावन भादों से, देख रहे थे आँसू भी जैसे पथ कईं रातों से। इधर ख़ुशहाली ने जैसे न…
घुमड़-घुमड़ घनघोर घटा छाए रही - मनहरण घनाक्षरी छंद - राहुल राज
घुमड़-घुमड़ घनघोर घटा छाए रही, स्वेत घन श्याम बन गगन गर्जन लगे। लगत है बच रहे इन्द्र के नगाड़े आज, दानव दलन देव रण में सजन लगे। उमड़ प…
बरसो बदरा धरती प्यासी - कविता - अनूप अंबर
बरसो बदरा धरती प्यासी, देख कृषक की ज़रा उदासी। सब मंगलमय हो जाएगा, यदि गर्ज-गर्ज के तू गाएगा। अम्बर कृषक निहार रहा है, तुम्हें बारंबार …
बादल आओ - कविता - राजेश 'राज'
वर्षा की जलधार लिए वारि कणों की फुहार लिए श्यामल बादल आ जाओ अपना प्रेम उड़ेलो सब पर सब में जीवन भर जाओ श्यामल बादल आ जाओ। वृक्षों की त…
बादल - कविता - उमेन्द्र निराला
हे बादल! अब तो बरसो भू-गर्भ में सुप्त अंकुर क्षीण अनाशक्त, दैन्य-जड़ित अपलक नत-नयन चेतन मन है, शांत। नीर प्लावन ला एक बार देख प्रकोप ह्…
बादल मगन हो गए - नवगीत - अविनाश ब्यौहार
बरसता पानी ख़ूब, बादल मगन हो गए। हैं कर रहीं लहरें उत्पात। पावस की हुई बहुत बिसात॥ उजड़ जाए है ऊब, बादल मगन हो गए। धरा हो गई पानी-पानी।…
ओ नभ के मंडराते बादल - कविता - आशीष कुमार
ओ नभ के मंडराते बादल! तनिक ठहर तनिक ठहर। अभी-अभी तो आया है तू, विशाल गगन पर छाया है तू। लौट ना जाना तुम अपने घर, नई नवेली दुल्हन सी शर…
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