संदेश
आज़ादी का त्यौहार - बाल कविता - सूर्य प्रकाश शर्मा | स्वतंत्रता दिवस पर बाल कविता
तीन रंग से बना तिरंगा, आज इसे फहराएँगे। 'जन गण मन अधिनायक' सारे बच्चे मिलकर गाएँगे॥ भारत की है शान तिरंगा, हम सबकी है जान तिरं…
विद्यालय संग सात दिवस - बाल कविता - रविंद्र दुबे 'बाबु'
सोमवार को भोर हुआ, स्कूल जाने बड़ शोर हुआ। मंगलवार दिन बड़ा सुहाया, दोस्तो का हैं साथ दिलाया। बुधवार को सब मस्ती करते, टीचर पढ़ात…
पहली कक्षा - बाल कविता - गोलेन्द्र पटेल
हम हर दिन पढ़ने जाते हैं, हम सब यह गाते हैं, कलम के आगे झुकता है भाला, सबसे प्यारी है हमारी पाठशाला। हम पहली कक्षा के विद्यार्थी है…
प्यारी बहना - कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
बहन की रक्षा करने का है, दृढ़ संकल्प हमारा। साथ पलें हैं साथ बढ़े हैं, प्यार हमारा न्यारा। कभी झगड़ते, कभी मचलते, कभी करें शैतानी। दिन-द…
हम हैं छोटे-छोटे बच्चे - कविता - राहुल भारद्वाज
हम हैं छोटे-छोटे बच्चे, त्यौहार हमें लगते हैं अच्छे। स्कूल में पड़ जाते हैं अवकाश, दिन होते हैं वो कितने ख़ास॥ पढ़ने की कोई चिंता नहीं,…
नव प्रभात अब आया है - गीत - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
नई उमंगे सँग में लेकर, नव प्रभात अब आया है। बुरा समय अब बीत गया है, नई किरण इक आई है। चहुँदिश फैल रहा उजियारा, ख़ुशहाली अब छाई है। बनी …
आया दीपों का त्यौहार - बाल गीत - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
झट पट दिए निकालो बच्चों, आया दीपों का त्यौहार। चिड़ियाँ चहक रहीं उपवन में, घर-घर में रौनक़ आई। मौसम अब हुआ सुहावना, चहुँदिश हरियाली छाई।…
दहेज - बाल गीत - संजय राजभर 'समित'
गुड्डे-गुड्डी की शादी में, बच्चे सब शरारती हैं। कुछ बने हैं बाराती यहाँ, तो कुछ बने घराती हैं। कुछ नाच रहे हैं उछल-उछल, कुछ पीट रहे …
माटी तेरी चन्दन है - बाल कविता - हनुमान प्रसाद वैष्णव
भारत माँ तेरे चरणो में हम बच्चों का वन्दन है। जल तेरा अमृत की धारा माटी तेरी चन्दन है॥ तेरे आँचल की छाया में माता हमने जन्म लिया। फूले…
पतंग - बाल कविता - डॉ॰ राजेश पुरोहित
आदमी की ज़िंदगी पतंग सी कभी रंग बिरंगी चमकती, डोर कट जाए रिश्तों की तो न जाने कहाँ-कहाँ भटकती। लक्ष्य को पाने ऊँचाइयाँ छू लेती कभी हिचक…
तितली - बाल कविता - डॉ॰ राजेश पुरोहित
काली पीली नीली गुलाबी तितली रानी आओ न। नहीं पराग बचा फूलों में अब तो पास आओ न।। जब भी तुम आती हो मन भी ख़ुश कर देती हो। कली कब फूल बन ज…
ऐसा मैं नन्हा कलाम हूँ - बाल गीत - भगवत पटेल 'मुल्क मंजरी'
दुनियाँ मुझको याद करे ऐसा मैं नन्हा कलाम हूँ। खेल, खिलौने, कन्चे, गेंद, मुझको लगते प्यारे। फूलों के संग तितली रानी, भौरे कितने न्यारे।…
आदर्श शिक्षक - बाल गीत - भगवत पटेल 'मुल्क मंजरी'
जीवन भर जो सीखे बच्चों वो शिक्षक कहलाता है। पढ़ता लिखता और सिखाता, नवाचार वो करता है। अपना धर्म सही निभा कर, युग निर्माण करता है। पदचि…
हिन्दी - बाल कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
हिन्दी है इक प्यारी भाषा, मेरे हिंदुस्तान की। बड़ी सरल है मेरे बच्चों, भारत देश महान की।। नजमा बोले, राखी बोले, और बोलते सुखविंदर। जॉन,…
चिड़िया रानी - कविता - प्रवीण
चिड़िया रानी बड़ी सयानी, मोह माया सब इसने जानी। पंख फैलाए फुर हो जाती, यह कभी ना हाथ में आती। सुबह-सुबह यह जब है आती, सब के दिल को बहल…
मेरे गुरुजी सबसे अच्छे - बाल कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
आँखों मे चश्मा चमक रहा, है गेहुँआ रंग। धोती कुर्ता पहन कर आते, अजब निराले ढंग।। पतली छड़ी साथ वो लाते, जब कक्षा में आते। सब डर जाते देख…
सुहानी सुबह - बाल कविता - डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
नवल प्रात की नई किरण ने, छटा विकट फहराई, दूर हो गया तम तुरंत ही, नई सुबह है आईं। नन्ही नन्ही चिड़ियाँ चहकीं, और चहकते बच्चे, चीं-चीं कर…
पथ मेरा गुरुजन सरल करें - बाल कविता - भगवत पटेल
उपदेशों से मन होता भारी, सूक्ति वाक्य में समझ परे है। पुस्तक बोझ समझ कर ढोता, विद्यालय से हर रोज़ डरे है। कुछ ऐसा कर दो मेरे गुरुवर, म…
पंखा - बाल कविता - डॉ. कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
तीन पंखुड़ी जब मिल जाएँ, सरपट सरपट दौड़ी जाएँ। दौड़ दौड़ कर हवा चलाएँ, हवा हमे ये मिलती जाए, नन्ही गुड़िया हवा ये पाए, हवा चले तो निंदिया आ…
मेरी दुनिया माँ का आँचल - बाल कविता - श्याम सुन्दर श्रीवास्तव "कोमल"
मुझे कहीं सच में मिल जाएँ, अगर कहीं भगवान। और कहें यदि माँगो मुझसे, तुम कोई वरदान। अच्छे कपड़े और खिलौने, जो भी चाहो ले लो। गड्डे गुड़…
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