संदेश
बेटी - कविता - रामदयाल बैरवा
घूँघट नहीं, किताब थमा दो, नन्ही परी को पंख लगा दो, तोड़ दो ये झूठे बंधन, जो नारी को कहते अमंगल, जन्म से पहले प्राण गए, समाज बना हैं क्…
मुझको जग में आने दो माँ - कविता - अजय कुमार 'अजेय'
मुझको जग में आने दो माँ, यूँ मत मुझको जाने दो माँ। सदा तुझे आभार कहूँगी, माँ तुझसे मैं प्यार करूँगी। माँ तेरी हूँ मैं लाड़ो प्यारी, बन…
बेटी - कविता - महेन्द्र सिंह कटारिया
बेटी युग के नए दौर में, भूमिका निज निभा रहीं हैं। छूकर बुलंदियों की ऊँचाई, मान-सम्मान सब पा रहीं हैं। ज्ञान-विज्ञान प्रौद्योगिकी सहित,…
मेरी जान मेरी बेटी - कविता - जयप्रकाश 'जय बाबू'
बन के उजाला आई है मेरी जान मेरी बेटी, बन के आई मेरी मूरत मेरी पहचान मेरी बेटी। सूना था ये गुलिस्ताँ तेरे आने से खिल गया, पूरी हुई हर आ…
बेटी - कविता - गणेश भारद्वाज
भाग्य से मिलती है बेटी, हर नर के ऊँचे भाग कहाँ। जिस आँगन भी यह फूल खिला, करती है लक्ष्मी वास वहाँ। बिन बेटी घर-आँगन सूना, घर-आँगन की श…
बिटिया रानी - लघुकथा - राखी गौर
"अरे रीमा! तुम आ गई।" "हॉं बड़ी मॉं! और आप कैसी हो?" "मैं तो ठीक हूँ, तुम कैसी हो?" "मैं भी एक दम म…
बेटी - कविता - रमेश चन्द्र यादव
होते संचित पुण्य मानव के, घर मे तब आती है बेटी। बहन भार्या और माता, जाने, कितने रूप निभाती है बेटी। परिवार रहे ख़ुशहाल सदा, वृत और त्यौ…
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