संदेश
महात्मा - कविता - महेश कुमार हरियाणवी
जलते-बिलखते शोलों ने फिर गांधी जी विचारे है। पुनः चले आओ बलधारी जनता शान्ति पुकारे है॥ दधक उठी है सारी धरती मेघ से चलती गोलियाँ। देख स…
हमारे राष्ट्रपिता - कविता - गणपत लाल उदय
महात्मा गाँधी कहलाएँ राष्ट्रपिता हमारे, आत्मशुद्धि शाकाहारी प्रेरणा देने वाले। सादा जीवन व उच्च विचार रखने वाले, भारत देश को स्वतंत्रत…
जय गाँधी शास्त्री नमन - दोहा - डॉ. राम कुमार झा 'निकुंज'
सत्य त्याग शालीनता, कर्म धर्म समुदार। गाँधी शास्त्री युगल वे, स्वच्छ न्याय आधार॥ मार्ग अहिंसा विजय का, जीवन उच्च विचार। जीया जीवन स…
गांधी जी और स्वतंत्र भारत की स्त्री - लेख - सुनीता भट्ट पैन्यूली
गांधी जी का जीवन-दर्शन आश्रय स्थल है उन जीवन मूल्यों और विचारों का जहाँ श्रम है, सादगी है सदाचार है, आत्मसम्मान है, सत्य है, अहिंसा है…
दो स्वातंत्र्य समर योद्धा - कविता - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' | महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री पर कविता
नोवाखाली की गलियों में जो घूमा था वह गांधी है। अंग्रेजों को भगा दिया जो सत्याग्रह से वह गांधी है। सत पथ चला 'अंशुमाली' जो प्रा…
युगपुरुष: महात्मा गांधी - कविता - आर॰ सी॰ यादव
समय चक्र घूमा जब युग का अँधकार गहरा छाया। सन 1858 में भारत में अंग्रेजी शासन आया॥ नापाक इरादों से गोरों ने दुर्दिन को अंजाम दिया। ईस…
आज़ादी की आँधी महात्मा गाँधी - कविता - मदन सिंह फनियाल
ढाल-तलवार को छुआ नहीं, विजय पताका फहरा दी। सुलगा के चिंगारी आज़ादी की आग दिलों में लगा दी।। त्याग कर पथ हिंसा का, जोत अहिंसा का जगा दी।…
गाँधी बाबा थे महान - कविता - संदीप कटारिया
सत्य-अहिंसा के पुजारी गाँधी बाबा थे महान। दुनिया में सबसे ऊँची कर गए भारत की शान।। आज़ादी के संग्राम के थे वो-एक सच्चे सिपाही। प्रेम-भ…
स्वराज मिलेगा - कविता - रमेश चंद्र वाजपेयी
गाँधी जी आपने कहा था की स्वराज मिलेगा। पर घीसा को एक जून रोटी चिथड़ों से ढ़की सौष्ठव काया ही हजूरी में जवान लटी क्या उसके जीवन में समूं…
बापू तेरे देश में - कविता - मोहम्मद मुमताज़ हसन
गोरों को था मार भगाया तूने, आज़ादी का ध्वज फहराया तूने! दी कुर्बानी देश की खातिर , मिटे देशभक्ति के आवेश में! लेकिन अब क्या हो रहा है, …
बापू - दोहा - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"
शील त्याग गुण कर्म का, मानक था जो लोक। सत्य अहिंसा सारथी, गाँधी थे आलोक।। सहज सरल नित सादगी, मृदुभाषी सद्नीति। शान्ति दूत अतुलित प्रखर…
प्रकटे बापू - कविता - सुषमा दीक्षित शुक्ला
दो अक्टूबर महापर्व है, भारत के इतिहास में प्रकटे बापू भानु इसी दिन, धरा देख तम पाश में। सत्य अहिंसा व्रत को लेकर, चरख चक्र ले हाथ मे…
दो अक्टूबर - कविता - नूरफातिमा खातून "नूरी"
दोनों फूलों ने हिन्दुस्तान को महकाया, भारत के वीर सपूत होने का वचन निभाया। एक ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया, डूबते हुए भारत को मजब…
बापू क्या करोगे यहाँ आकर? - लेख - सतीश श्रीवास्तव
पूज्यनीय बापू, सादर प्रणाम। बापू आपके सपनों का भारत वैसा नहीं बन सका इस बात का हमें कम और उन्हें ज्यादा खेद रहता है जिनके कन्धों पर दे…
लाचार - कविता - सुधीर श्रीवास्तव
गांधी तेरे देश में आज भी तेरे बंदर मौन हैं, अब तो लगता है उन्होंने ने भी इसे नियति का खेल समझ लिया है क्योंकि अब वे भी विचलित कहां हैं…
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