संदेश
जीवन - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
अरे! 'अंशुमाली' लघु जीवन फिर भी चलते जाना है। नंद नाले कंटक वन गह्वर में भी बढ़ते जाना है। जीवन के पन बीत रहे हैं फिर भी संबल …
कर्कश मत बोलो - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
भले कहीं कोई पथ भूला पर कर्कश मत बोलो, राम लखन सीता माता के जीवन से निज को तोलो। मृदु भाषा के वचनामृत से तुम जीतो दिल पर का– हरो '…
ज्योति पर्व - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' | दीवाली पर मुक्तक
निर्धन की झोपड़ियों में जा दीपक एक जला आना, लाई गट्टा खील खिलौने जाकर उन्हें खिला आना। जहाँ शहीदों की समाधि हो शीश झुकाकर दीप जलाना– फ…
रक्षाबंधन - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
रक्षाबंधन के दिन बहना राखी तुमको लाई, माथे तिलक लगाकर बाँधी रक्षासूत्र कलाई। युग-युग जिओ बधाई तुमको चमको जैसे तारा– रक्षा में प्राणों …
आज़ादी - मुक्तक - इन्द्र प्रसाद
गगन साक्षी शहीदों का मिली कैसे है आज़ादी। चूम फंदे लिए हंँसकर बढ़ाकर बाँह फौलादी। वतन की यज्ञशाला में बनाया हव्य शीशों का, शहीदों के अथक…
पन्द्रह अगस्त - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
पन्द्रह अगस्त की पावन वेला झण्डा गृह फहराओ, वीर शहीदों की समाधि में जा घृत दीप जलाओ। उठो 'अंशुमाली' बोलो तुम जय-जय भारत माता– …
सीमा के पहरुओं - मुक्तक - श्याम सुन्दर अग्रवाल
1 ओ नेफ़ा के रक्षक जवान, ओ हिमगिरि पर भारत की शान, ओ सीमाओं के पहरेदारो, कर रहा देश तुमको प्रणाम। 2 तुम लिए शस्त्र, पर शांतिदूत, तुम बढ…
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