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नीलकंठ दर्शन विहग - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
खल कामी हिंसक दनुज, हो विनाश नवरात्र। महादेव विषपान से, नीलकंठ शिव गात्र॥ विजयादशमी मांगलिक, रखें जयन्ती शीश। नीलकंठ दर्शन विहग, प्…
शिव स्वरूप श्री नीलकंठ - गीत - उमेश यादव
दिव्य मनोहर सुन्दर नभचर, शिव दर्शन मनभावन है। शिव स्वरूप श्री नीलकंठ का, शुभदर्शन अति पावन है॥ रावण वध से पूर्व राम ने, शिवशंकर आह्व…
नव प्रगति शान्ति नव विजय कहूँ - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
रावण दहन के इतिहास में, मैं दानवता का अंत कहूँ। या पाखंड मुदित खल मानस, कोटि रावण अब आभास करूँ। परमारथ सुख शान्ति लोक में, यश विज…
दशहरा का पर्व पावन - कविता - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
दशहरा का पर्व पावन 'अंशुमाली' का नमन। ख़ुश रहो सब मीत मेरे स्नेह लो पावन गहन। बढ़ो उन्नति पंथ पर तुम शुभकामनाएँ दे रहा– लघु मीत…
रावण दहन - कविता - आशीष कुमार
लगा हुआ है दशहरे का मेला, खचाखच भरा पड़ा मैदान है। चल रही है अद्भुत रामलीला, जुटा पड़ा सकल जहान है। धनुष बाण लिए श्रीराम खड़े, सामने ख…
विजयादशमी - कविता - रमाकांत सोनी
हर हाल में हर काल में अभिमानी रावण हारा है, अहंकार का अंत हुआ सच्चाई का उजियारा है। विजयदशमी विजय उत्सव दशहरा पावन पर्व, मर्यादा पुरुष…
विजय पर्व हो शान्ति का - गीत - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"
परमारथ सुख शान्ति लोक में, यश विजय दीप आलोक कहूँ। विजयपर्व यह सत्य न्याय का, दशहरा या रामराज्य कहूँ। कलियुग के इस व…
विजय पर्व - कविता - सुधीर श्रीवास्तव
हम सब हर साल रावण के पुतले जलाते हैं विजय पर्व मनाते हैं, शायद मुगालते में हम खुद को ही भरमाते हैं। वो सतयुग था जब राम ने रावण को मार…
हो विजया मानव जगत् - दोहा छंद - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"
सकल मनोरथ पूर्ण हो, सिद्धदातृ मन पूज। सुख वैभव मुस्कान मुख, खुशियाँ न हो दूज।।१।। सिद्धिदातृ जगदम्बिके, माँ हैं करुणागार। मिटे समागत आ…
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