संदेश
वीर सपूत - कविता - डॉ॰ रेखा मंडलोई 'गंगा'
दमनकारी नीतियों और अत्याचारों का फैला था ताण्डव जब चारों ओर, वीर कुँवर सिंह, मंगल पाण्डे और बिस्मिल जैसे देश भक्तों ने तभी दिखाया अपना…
कालभोज की गौरव गाथा - कविता - संगीता राजपूत 'श्यामा'
कालभोज की गौरव गाथा आओ तुम्हे सुनाते हैं, धरती मेवाड़ी जन्मे योद्धा वीर सभी कहलाते हैं। सन् सात सौ तेरह में जन्मा भीलो ने बप्पा नाम दिय…
अग्निवीर - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
हम अग्निवीर सीमा प्रवीर, बलिदान राष्ट्र पथ जाते हैं। हम शौर्यवीर गंभीर धीर, स्वाभिमान विजय रण गाते हैं। हम महाज्वाल हैं क्रान्ति अन…
भारत के वीर - गीत - विजय कृष्ण
हैं वीरों के भी वीर जहाँ, मैं दृश्य वहीं दिखलाता हूँ। भारत का रहने वाला हूँ, वीरों की बात सुनाता हूँ।। हिंदू मुस्लिम भेद नहीं, सरहद पे…
हम सरहद के रखवाले - कविता - गणपत लाल उदय
हम मातृभूमि सरहद पर करते रहते रखवाली, इसके लिए क़ुर्बानी देना, समझते गौरवशाली। चाहे घुसपैठियों, उग्रवादियों, नक्सलवादियों से, भू-रक्ष…
हम हिन्द के वीर जवान - गीत - समुन्द्र सिंह पंवार
हम हिन्द के वीर जवान, हमारा क्या कहना। नहीं कोई हमारे समान, हमारा क्या कहना।। नहीं किसी से डरते हैं हम, सदा आगे को बढ़ाते क़दम, ना रोक स…
इतिहास के पन्नों में गुम नायक क्षितिज मुखोपाध्याय - आलेख - डॉ॰ ममता बनर्जी 'मंजरी'
स्वाधीनता का 75 वर्ष मनाया जा रहा है। लोग एक-दूसरे को बधाइयाँ दे रहे हैं। मैनें भी दिया। लेकिन देश के वीर सपूतों को याद करने के क्रम म…
देशभक्ति - गीत - दीपा पाण्डेय
खड़ा हिमालय नतमस्तक-सा मौन सदृश सब देख रहा, नदियों के पावन जल-कण में वीरों का स्वर गूँज रहा। देश की रक्षा की ख़ातिर तुम देशभक्त कहलाते ह…
वीर जवान - कविता - तेज देवांगन
बादल गरजे, बिजली चमके, ख़ून जमे या स्वेद बरसे, खड़े वो सीना तान है, मेरे देश के वीर जवान है। हाँ मेरे देश के वीर जवान है।। गोली की बौछा…
वीर बन - कविता - तेज देवांगन
जो टूटे ना वो तीर बन, दुश्मनों के लिए शमशीर बन, हालातो से लड़ कर तू, ज़िंदगी से तू वीर बन। गरजते है ये बादल तो, चमकती है बिजलियाँ, तू र…
भारत माँ की तुम हो शान - कविता - डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी"
सिसोदिया राजवंश के राजा, भारत माँ की तुम हो शान। राणा सांगा के पोते तुम, उदय सिंह के पुत्र महान।। सकुशल योद्धा भारत के तुम, बहादुरी के…
वीरों को सलाम लिखूँ - कविता - विकाश बैनीवाल
जब चाहे लिखूँ सुबह या शाम लिखूँ, वीरों का शौर्य यारो मैं सरेआम लिखूँ। कुछ भी लिखूँ कविता-ग़ज़ल लिखूँ, हर एक शब्द मैं वीरों के नाम लिखू…
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