संदेश
उर्मिला का वियोग - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव
तुम गए हो दूर जो, प्राण अब तड़प रहे, मेरे हिय में शूल-सा, दर्द है कसक रहे। तुम बिन ये प्रहर सभी, शून्य से प्रतीत हों, नीरहीन मेघ से, न…
पापा का जाना - कविता - तुलसी सोनी
आँखों के सामने छा गया अचानक अंधकार। मैं ज्वालामुखी में जल रहा था, अतिवृष्टि से मेरा हृदय दहल रहा था, भूकंप के झटकों से मैं डोल रहा था,…
क्या मेरे भी दिन फिरेंगे? - कविता - कार्तिकेय शुक्ल
प्रश्न अभी भी हैं अनुत्तरित क्या उनके उत्तर मिलेंगे? प्रिय, सच-सच अबकी कहना क्या मेरे भी दिन फिरेंगे? मैं अकेला सोचता हूँ रात-दिन बस ब…
अश्रुमय जीवन - कविता - प्रवीन 'पथिक'
आज कल मन बहुत उदास है! शायद! कुछ भी नहीं मेरे पास है। दर्द रुलाता है, ऑंखें भर आती हैं, उदासी फिर भी नहीं जाती है। सपनें नहीं टूटे, टू…
इक छोटा सा पत्थर हूँ - कविता - मोहम्मद रब्बानी
मैं विडंबनाओं की गली से निकला, इक छोटा सा पत्थर हूँ। मैं धोखों में धोखा खाया, इक पथ के कंकड़ सा हूँ। मैं दोस्तों से बिछड़ा हुआ, इक अक…
एक फ़ितरत सी हो गई है - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
एक फ़ितरत सी हो गई है, चुप्प रहना। कितने मकानों की कथा, चिल्लाती ऑंखों की व्यथा। बस फँस गई है, भूल गया कहना। खारी बूँदों से भरी, पत्तिय…
पीड़ा सर्ग से - कविता - हर्षित अवस्थी 'मानस'
बढ़ रही व्यथा मन में, एक छवि ने है हिलाया। बैठ मेरे अंक में ही, एक प्रिय ने विष पिलाया। अब न हिलते अधर मेरे, बिक गई मुस्कान मेरी। अब …
माँ देवकी की वेदना - कविता - शालिनी तिवारी
देवकी के सुन नैनों में फिर उठी, हुक कान्हा के दरस की, एक बार दिखला दे कोई झलक, एक हर बीते बरस की। पहले उसकी मुस्कान थी कैसी, कैसे आँखो…
प्रेमिका - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव
जन्मों का वादा था, राह में ही वो छोड़ गई। था नाज़ुक सा हृदय मेरा, जिसको वो तोड़ गई। प्राण बसे है तुझमें मेरे, ऐसी बातें करती थी। हर …
क़ैदी - कविता - कोमल बैनिवाल 'साहित्या'
मैं वो क़ैदी हूँ, जिसने सलाख़ें नहीं देखी। मैं वो पापी हूँ, जिसने पाप नहीं किया। मैं वो आसमाँ हूँ, जो ज़मीं पर बसता हूँ। मैं वो आँसू हूँ,…
वेदना के गीत - कविता - संजीव चंदेल
चलो वेदना के गीत गाते हैं, चलो विपदा को मीत बनाते हैं। दुख की सीमा तो घनीभूत है, फिर भी सबके मन में प्रीत जगाते हैं। गीत दर्द की रूबाई…
विरह वेदना - कविता - राजेश 'राज'
कैसे लिख पाऊँ मैं विरह वेदना? ख़ामोशियाँ बेशुमार कुछ लिखने की नाकाम कोशिशें अंतर्मन में सुलगती विरह अग्नि से उठता अदृश्य धुआँ मीलों न क…
सोचता हूँ - कविता - प्रवीन 'पथिक'
सोचता हूँ, कुछ लिख लूँ। लिखना, दर्द को कुरेदता है; या हृदय को झकझोरता है। दोनो स्तिथियों में, आहत होता हृदय ही। जिसने प्रश्रय दिया था …
पुष्प की पीड़ा - कविता - रमाकान्त चौधरी
संवेदनहीन हुआ मानव तो ख़त्म हुईं सब आशाएँ, समझ नहीं पाया यह मानव मेरे मन की अभिलाषाएँ। अभिलाषा थी वीरों के पाँव तले बिछ जाने की, देश…
मैं हारा हुआ एक भिक्षुक - कविता - राघवेंद्र सिंह
मैं हारा हुआ एक भिक्षुक, काया मेरी अधमरी हुई। मत पूछो मेरा हाल कोई, कितनी करुणा है भरी हुई। न ठौर ठिकाना है कोई, व्याकुलता बढ़ती जाती …
शिकायत - कविता - अवनीत कौर 'दीपाली'
अथाह उम्मीदों का कारवाँ जब मेरी राहों से बिछड़ने लगा हर उस शख़्स से, शिकायत होने लगी जो मुझे तन्हा करने लगा। शिकायत भी उन्हीं से होती …
वेदना के स्वर - कविता - कवि सुदामा दुबे
वेदना के स्वर लिए वो श्वास के सितार पर, हिये से अधीर हुई लुटे से दयार पर। नीर लिए नैनों में कर रही विलाप वो, देख रही बार बार बिखरी सी …
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