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सीता - मत्तगयंद सवैया छंद - सुशील कुमार
राम गए वनवास तो राम के साथ में साथ निभा गई सीता, प्रेम पुनीत चराचर में सचराचार को बतला गई सीता। सीय को सीय बनाया जो राम तो राम को राम …
साँच कहूँ सुन साथ चले सब - सवैया छंद - महेश कुमार हरियाणवी
साँच कहूँ सुन साथ चले सब, बात यही सब को बतलाना। जीवन में मतभेद नहीं रख, द्वेष कहाँ तक है टिकपाना। बादल भी कितना ठहरे नभ, आख़िर तो ध…
प्रेम - सवैया छंद - सुशील कुमार
प्रेम न होत जो भ्रात को भ्रात से तौ पद त्राण न राज चलाते। प्रेम न होत जो भक्त से ईश को तौ शबरी फल जूठ न खाते॥ प्रेम न होत जो राम को सी…
हनुमान - सवैया छंद - सुशील कुमार
सीय हरी जब रावण सिंधु को लांघि मिलाए दिए बजरंगी। रावण के अभिमान गुमान का लंक जलाए दिए बजरंगी॥ प्रश्न उठा जब राम की भक्ति प्रमाण दिखा…
राम - सवैया छंद - सुशील कुमार
राम के नाम सा नाम नहीं जग संत कहें श्रुति चारि बखानी, राम कथानक राम स्वयं बिन राम नहीं कहीं राम कहानी। राम बिना नहिं राम कहीं बस राम…
शबरी के मन मध्य भक्ति दीप जलता है - सवैया छंद - देवेश बाजपेयी
शबरी के मन मध्य भक्ति दीप जलता है, जिससे प्रकाश टेर-टेर बीन लाती है। काल को चुनौती वह देती गुरु आज्ञा पाए, घोर अंधकार में सबेर बीन लात…
कर्म लिखई बिन कागज हीे - सवैया छंद - देवेश बाजपेयी
कर्म लिखई बिन कागज ही, इक तोरी चलई न कोई होशियारी। साक्ष्य बने बिन आनन ही, चाहें लाख करो जिन बात हमारी॥ गणना करे बिन गणना ही, जैसे सूर…
मन भायो कहां व्रंदावन में - सवैया छंद - राहुल सिंह "शाहावादी"
मन भायो कहां व्रंदावन में, जहां कंट करीलन कै डगरी री। छछिया भरि छाछ है मांगि रहै, जो है दूध दही मख कै नगरी री।। कतरानी फिरै सब संग सखी…
मुरली माधुरी - सवैया - राहुल सिंह "शाहावादी"
कारे कि कारि बङी मुरली, कुटिला यह कूर सुनावत गारी।। गैलन कूक भरै जमुना तट, सुनाय खिझावत रात ये सारी।। कांख लगी रहै सांझ सो ऐ, …
क्रष्ण विरह - सवैया - राहुल सिंह "शाहावादी"
ब्रज की वनिता सब बारि गई , मुस्कान पै एक बनाने कहानी।। अति लागत पीर महा हिय सों, लगियाद कि मार सवै नसियानी।। बिन प्रान सों मू…
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