संदेश
विधा/विषय "सियासत"
वतन - ग़ज़ल - ज़ीशान इटावी
शनिवार, फ़रवरी 06, 2021
सियासत में जो आए हो तो इतना काम कर देना, तुम अपनी ज़िन्दगी अपने वतन के नाम कर देना। जुदा भाई को भाई से करे नफ़रत जो फैलाए, तुम ऐसी सा…
सियासत बाँटती रही मरहम - ग़ज़ल - मोहम्मद मुमताज़ हसन
गुरुवार, जनवरी 21, 2021
हर बार रहनुमा तेरा झूटा निकला! काग़ज़ काग़ज़ कोरा वादा निकला! सियासत बाँटती रही मरहम मगर, हर ज़ख्म अवाम का ताज़ा निकला! निकल पाई जिसके दर पे…
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