संदेश
मतना गर्भ म्हं मार बेटी - हरियाणवी ग़ज़ल - समुन्द्र सिंह पंवार
अरकान : फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन तक़ती : 2122 2122 मतना गर्भ म्हं मार बेटी, सृष्टि का सिंगार बेटी। लक्ष्मी का हो रूप दूसरा, मतना समझो भार ब…
अजेय योद्धा - हरियाणवी रागनी (लोकगीत) - समुन्द्र सिंह पंवार
अजेय योद्धा कहती दुनिया सूरजमल महाराज तनै, जाट सुरमा युगों-युगों तक पूजै जाट समाज तनै। 13 फरवरी, 1707 का बड़ा पवित्र दिन था, देवकी माँ …
ख़ुशियों के दिन फिर आवैंगे - हरियाणवी गीत - अशोक योगी "शास्त्री"
दु:ख के बादल छट जावैंगे, थाम उस प्रभु का नाम जपो। ख़ुशियों के दिन फिर आवैंगे, हृदय में विश्वास रखो। दुश्मन तै हाम्म डरते कोन्या, पीठ दि…
जय शारदे मात - गीत - समुन्द्र सिंह पंवार
तेरी जय हो शारदे मात, तेरी जय हो शारदे मात। तेरी सूरत सै माँ प्यारी, तू करती हंस सवारी। सै वीणा तेरे हाथ, तेरी जय हो शारदे मात।। तू गी…
मंनै तेरे तै प्यार होग्या - हरियाणवी ग़ज़ल - समुन्द्र सिंह पंवार
मंनै तेरे तै प्यार होग्या। जीणा यो दुस्वार होग्या।। भूल गया सुध - बुध मै तो, जब तै तेरा दीदार होग्या। तु दीखै तो चमक -चांदनी, …
मस्त महीना सामण - हरियाणवी गीत - समुन्द्र सिंह पंवार
पींग - पाटड़ी ठाकै गौरी झूलण चाली बाग मै मस्त महीना सामण का वैं मस्त हुई रंग राग मै करकै हार - सिंगार नार वैं बागां के म्हां आई ज…
तेरै याद सै के भुलगी - हरियाणवी कविता - समुन्द्र सिंह पंवार
वो पहली मुलाकात वो सावन की बरसात तेरै याद सै के भुलगी करकै ट्यूशन का बहाना वो मिलन मेरे तै आना तेरै याद सै के भुलगी मेरै आग…
वीर वधुओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान - गीत - समुन्द्र सिंह पंवार
देश की रक्षा करते हैं जो छोड़ कै घर और गाम पैसे के लालच में उनको मतना करो बदनाम कुछ तो उनकी शर्म करो रै बिन प…
भूखे मरने लगे कलाकार - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
भूखे मरण लगे कलाकार , इनकी मदद करो इनके ठप्प होगे रोजगार , इनकी मदद करो लोकडॉउन के कारण भाई इनके ऊपर आफत आई सब होगे बेरोजग…
घणे तंग होरये मजदूर - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
घणे तंग होरये सैं मजदूर जाणा पैदल घणी दूर घणी होरयी सै परेशानी संग मैं बच्चे और जनानी दिये सता बिना ये कसूर जाणा पैदल घणी दूर…
जवानों को सलाम - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
देश की रक्षा करते हैं जो सीमा पै सुबह -शाम उन जवानों को प्रणाम, उन जवानों को सलाम चौबीस घण्टे रहते हैं जो बोडर पै तैनात कफ़…
लोकडॉउन के फायदे - हरियाणवी कविता - समुन्दर सिंह पंवार
लोकडॉउन के फायदे सुणलो आज बताऊँ भाई सारी प्रकृति खिल उठी कली - कली मुस्काई प्रदूषण होग्या खत्म और वातावरण होया साफ रै लोकडॉउन क…
जननी - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
उपकार कदे ना भूलो उसका जिसने दुनिया दिखाई भगवान के तुल्य हो सै जग में सुणल्यो जननी माई नों महीने तु रखा गर्भ में ओटी सैं घण…
श्री राम कथा - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
श्री राम कथा का करते हैं हम प्रेम से गुणगान सुणियो रै धर कै ध्यान अवधपुरी के राजा दशरथ औलाद बिन ल…
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ - गीत - समुन्दर सिंह पंवार
छोड्यो पुराणी बातां नै इब इकीसवीं सदी आई बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ सबकी इसमै भलाई बेटी हैं सृष्टि का आधार बिन बेटी ना …
समय समय की बात - ग़ज़ल - समुन्दर सिंह पंवार
समय - समय की बात हों सैं कदे दिन बड़े कदे रात हों सैं कदे पड़ज्या भयंकर सूखा कदे बाढ़ के हालात हों सैं कदे तारीफा की लगै झड़ी कद…
अन्न दाता भगवान - लोकगीत - समुन्दर सिंह पंवार
दिन रात मेहनत करकै अन्न उगावे बेअनुमान बार बार प्रणाम तनै मेरा अन्नदाता भगवान गर्मी सर्दी सहता है तू सहता भूख और प्यास एक दिन क…
कोरोना तेरे कोरोना हो जा - हरियाणवी कविता - राहुल जाटू
कोरोना तेरे कोरोना हो जा जाइयो तेरा नाश रे तेरे डर ते बैठ सके ना पड़ोसी-पड़ोसी के पास रे तेक जरा सी खाँसी हो जा तेरा डर खाई जावे…
कोरोना का कहर - हरियाणवी कविता - समुन्दर सिंह पंवार
रै सुणले कोरोना बदकार, तनै यो नचा दिया संसार ठप्प कर दिये काम और धंधे तनै घणे खा लिये बन्दे मची चोगरदै हा -हाकार , तनै यो नचा…
जीन्स का शौक़ राखण आली - हरियाणवी कविता - राहुल जाटू
जीन्स का शौक़ राखण आली आज साड़ी की सोचण लागी पिज़्ज़ा बर्गर खावण आली आज रोटी पोवण लागी काल तक जो बावळी सी बात करे थी आज वा साणी सा…
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