संदेश
शुभ दिवस दिवाली - कविता - कर्मवीर 'बुडाना'
दीप जल उठे हैं इतने, कि यक़ीं हैं तम हटेगा अमावस का, तू चेहरे पर ख़ुशियाँ रख, चाँद भी आएगा शुभ दिवस का। आज वसुंधरा ने पहनी हैं सुंदर तार…
आज दीवाली है आँगन दीप से भर दो - गीत - श्याम सुन्दर अग्रवाल
आज साथी शुभ लगन है, और यह मन भी मगन है, बह रहा शीतल पवन है, कह रहा श्यामल गगन है– रात की काली चुनरिया झिलमिली कर दो, आज दीवाली है आँगन…
जगमगाते दीप - कविता - रूशदा नाज़
थके हुए मन से क्यूँ जीते है? उदास चेहरे पर मुस्कान लाते है आइए उमंगो में जीते है जगमगाते जग में स्नेह का दीपक जलाते है आइए मिलकर दिवाल…
दीप जले सद्भावना - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज' | दिवाली पर दोहे
दीप जले परहित मदद, बचपन ज्ञानालोक। मिटे अंधेरा दीनता, भूख प्यास तम शोक॥ सागर मंथन से प्रकट, धन्वन्तरि भगवान। दीप जले जय सुख विभव, ख़ुशि…
ज्योति पर्व - मुक्तक - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' | दीवाली पर मुक्तक
निर्धन की झोपड़ियों में जा दीपक एक जला आना, लाई गट्टा खील खिलौने जाकर उन्हें खिला आना। जहाँ शहीदों की समाधि हो शीश झुकाकर दीप जलाना– फ…
पर्व पर आनंद मनाऊँ कैसे? - कविता - अंकुर सिंह
देखा था रोशनी जिन अपनों संग, बिछुड़ उनसे दीप जलाऊँ कैसे? रूठे बैठे है जो अपने सगे संबंधी, बिन उनके मैं तिमिर हटाऊँ कैसे? रिश्तों में उप…
हे धन लक्ष्मी मेरे घर आओ - कविता - रजनीश तिवारी 'अनपढ़ माशूक़'
हे धन लक्ष्मी मेरे घर आओ हम दुखियों का कष्ट मिटाओ भव सागर से पार लगाओ दर्शन दो माँ दरश दिखाओ दर्शन दो मुझे दरश दिखाओ हे महालक्ष्मी मेर…
दीपावली की महिमा - कविता - शरद कुमार शिववेदी
दीपावली आई ख़ुशियाँ झोली भरकर लाई, पन्द्रह दिन पहले से तैयारी हो रही भाई। मकान व दुकान की साफ़-सफ़ाई, रंगाई-पुताई करो मेरे भाई॥ सामान की …
गीता और ओपेनहाइमर - कविता - प्रतीक झा 'ओप्पी'
विज्ञान की शक्ति को उजागर करने वाला दुनिया को बदलने वाला प्रतिभाओं का सरदार ओपेनहाइमर, गीता का था दीवाना। जब युद्ध का मैदान सजा विज्ञा…
आईना - कविता - आलोक गोयल
ख़ुद से मिलने का मन हो बस मेरे सामने आ जाना मैं आईना हूँ तेरा तुझे तुझसे ही मिलाऊँगा कोई परेशानी हो सही राह ना मिले तो बस सामने आ जाना…
स्वयं का सम्मान करें हम - गीत - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
स्वयं का भी सम्मान करें हम, सदाचार संस्कार चरित हो। विनत नियत गुण शील समन्वित, संकल्पित पुरुषार्थ सृजित हो। मानवीय गुण ललित लसित मन, आ…
कवि का जीवन रच जाओगे - कविता - राघवेंद्र सिंह
पथ चुनकर करके लक्ष्य अटल, पग तुमने ज्यों आरम्भ किया। निज ग्रंथि विषों से विष-वर्षण, विषदंतों ने प्रारम्भ किया। इस दुर्गम पथ पर हे मानव…
अपराध - गीत - संजय राजभर 'समित'
थका-थका-सा तन-मन मेरा, ठगा-ठगा घबराता हूॅं। जीवन क्या है समझ न पाया, अपराधी-सा पाता हूॅं। पाई-पाई अनमोल समझ, नाहक मन ललचाया था। पद-प्र…
भीतर से कोरा-कोरा - कविता - हेमन्त कुमार शर्मा
भीतर से तो कोरा-कोरा, खाली-खाली। बाहर सुनाता, अजब कहानी। मिट्टी के तन में, सोने की इच्छा। दूजों को कुछ समझे न, बस स्वयं ही अच्छा। पर क…
बिखरे ना हमारा बंधन - कविता - अंकुर सिंह
अबकी जो तुमसे बिछड़ा, जीते जी मैं मर जाऊँगा। रहकर जग में चलते फिरते, ज़िंदा लाश कहलाऊँगा॥ रह लो शायद तुम मुझ बिन, पर, मेरा जहाँ तुम बिन…
मेरे गीतों में - गीत - अतुल पाण्डेय 'बेतौल'
मेरे गीतों में अक्सर दिखता है एक अक्स घूँघट में, सब पूछते हैं मुझसे, जा उलझे हो किसकी लट में। कौंधता है कोई मेरी स्याही में, हर्फ़ बन क…
अमर प्रेम - कविता - चक्रवर्ती आयुष श्रीवास्तव
यह प्रेम अमर, अडिग, अविरल, तेरे नाम में समर्पित जल, यह दीप सदा जलेगा प्रिय, तेरे स्मरण का होगा फल। मिट्टी से उठा यह आकाश, तेरे चरणों क…
कविता मेरी - कविता - नंदनी खरे 'प्रियतमा'
व्यस्त तुम्हारा मन, एक व्यथित कविता मेरी, सह सूत्र में बंधे से तुम, जैसे गणित कविता मेरी। तुम आनंद में रंग जाओ, नामित कथित कविता मेरी,…
खनकती चूड़ियाँ - कविता - राजेन्द्र कुमार पाण्डेय 'राज'
चाँद सरीखा मुखड़ा दमके सितारों सा बिंदिया चमके काले मेघ तेरे कुन्तल बिखरे लट उलझे उगीलियाँ सँवारे घिर घिरकर आई घटाओं ने सुलझे तेरे केशो…
कैसी मायूसी है - कविता - प्रवीन 'पथिक'
हर बार कुछ छोड़ जाने को जी चाहता है। हर बार कुछ खो जाने को जी चाहता है। कैसी मायूसी है! जो कभी जाती नहीं। हर बार कुछ हो जाने को जी चा…
जीवन का गणित - कविता - आर॰ सी॰ यादव
उलझा हुआ गणित जीवन का दो-दो चार नहीं हो पाते। कर्म बिना जीवन का सुख कभी कहाँ, किसको मिल जाते॥ टूट गए सब दिल के अरमाँ सपने तितर-बितर हो…
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